Bhagavad Gita

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Chapter 5 - Shloka 8

नैव किञ्चित्करोमीति युक्तो मन्येत तत्त्ववित् । पश्यञ्श‍ृण्वन्स्पृशञ्जिघ्रन्नश्न‍न्गच्छन्स्वपन्श्वसन् ॥ ८ ॥

हिंदी अनुवाद

जिस मनुष्य में दिव्य चेतना है, जो सत्य को जानता है, देखते, सुनते, छूते, सूंघते, खाते, चलते, सोते और श्वास लेते हुए भी, इस तथ्य से अवगत रहता है कि वास्तव में इन कर्मों का कर्ता वह नहीं है।

English Translation

naiva kiñchit karomīti yukto manyeta tattva-vit
paśhyañ śhṛiṇvan spṛiśhañjighrann aśhnangachchhan svapañśhvasan