क्लेशोऽधिकतरस्तेषामव्यक्तासक्तचेतसाम् ||
अव्यक्ता हि गतिर्दु:खं देहवद्भिरवाप्यते || 5||
हिंदी अनुवाद
जिन लोगों का मन भगवान के निराकार रूप पर अनुरक्त होता है उनके लिए भगवान की अनुभूति का मार्ग अतिदुष्कर होता है। अव्यक्त रूप की उपासना देहधारी जीवों के लिए अत्यंत दुष्कर होती है।